ज़िंदगी जीना सीख लिया
ज़िंदगी ऐसी हो तुम्हारी,
कि आँसू भी आँखों से गिरें,
फिर भी अपनी ही कहानी पर
तुम मुस्कुरा सको।
किरदार इतना साफ़ हो तुम्हारा,
कि हँसते-हँसते भी रो सको,
और रोते हुए भी
खुद को हँसा सको।
दर्द मिले तो बिखरो नहीं,
खुशियाँ मिलें तो इतराओ नहीं,
हर रंग को खुले दिल से जीओ,
किसी हाल में खुद को खोओ नहीं।
जब आँसू और मुस्कान
एक साथ समझ आने लगें,
और ज़िंदगी की हर ठोकर में
कोई सबक नज़र आने लगे,
तब समझना—
तुमने सिर्फ़ ज़िंदगी काटी नहीं,
तुमने ज़िंदगी जीना सीख लिया।
-रजनी