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असली पहचान तो इंसान का किरदार होता है।

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परवरिश ही ऐसी हुई है हमारी,
        
                                                    
                            
न गरीब का मज़ाक उड़ाते हैं,
न अमीरों के तलवे चाटते हैं,
हम तो बस इंसानियत को सलाम करते हैं।

हमने सीखा है इंसान को इंसान समझना,
न दौलत से किसी की इज़्ज़त बढ़ती है,
न गरीबी से किसी की औकात घटती है।

कपड़े, ये गाड़ी, बंगला और कार,
बस पहचान का हिस्सा होते हैं,
इनसे कोई बड़ा या छोटा नहीं होता,
असली पहचान तो इंसान का किरदार होता है।

दौलत आज है, कल नहीं भी हो सकती,
चेहरा भी वक्त के साथ बदल जाता है,
मगर अच्छे कर्मों से बना किरदार
इंसान के जाने के बाद भी याद आता है।

हमारी नजर में वही इंसान बड़ा है,
जिसके दिल में इंसानियत ज़िंदा है,
क्योंकि दुनिया में सबसे ऊँची पहचान
इंसान होने की होती है।
— रजनी
एक महीने पहले
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