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अपनी आत्मा की शांति चुनता है।

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हक़ और शांति
        
                                                    
                            

हक़ का लेना चाहिए,
हराम का नहीं,
किसी का छीनकर
अपना घर बसाना नहीं।

जो तुम्हारा है,
उसे पाने का अधिकार है तुम्हें,
मगर किसी की बर्बादी पर
अपनी जीत मनाना नहीं।

और जहाँ तुम्हारे हक़ की कीमत
किसी की शांति बन जाए,
जहाँ उसे पाने की जिद में
रिश्तों में आग लग जाए,

वहाँ कभी-कभी
हक़ भी छोड़ देना चाहिए,
क्योंकि हर जीत
पाने से नहीं होती—

कुछ जीत ऐसी भी होती हैं
जब इंसान अपना हक़ छोड़कर
अपनी आत्मा की शांति चुनता है।

हक़ ज़रूरी है,
मगर हर हक़ से ऊपर
सुकून ज़रूरी है।
-रजनी
एक घंटा पहले
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