विज्ञापन

एक झटके का दर्द

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक झटके का दर्द
        
                                                    
                            

मानती हूँ,
एक झटके में मिला दर्द
बहुत पीड़ादायक होता है,
क्योंकि वह एक साथ आता है,
अचानक आता है
और हमें भीतर तक हिला जाता है।

लेकिन सोचो,
वह दर्द सिर्फ़ एक बार मिला है,
शायद तुम्हें अपने जीवन के
निन्यानवे प्रतिशत दर्द से बचा गया है।

रिश्तों को छोड़ना कठिन होता है,
किसी अपने से दूर होना
एक पल में तोड़ देता है,
मगर कभी-कभी
वही एक पल का दर्द
पूरी उम्र के दर्द से बचा लेता है।

क्योंकि जो दर्द
तुम तीस-चालीस साल तक
किश्तों में झेल सकते थे,
वही दर्द अगर एक साथ मिला,
तो वह भले ही बहुत बड़ा लगा,
पर उसकी एक सीमा तो थी।

किस्तों में मिलने वाला दर्द
हर दिन थोड़ा-थोड़ा मारता है,
उम्मीद देता है,
फिर तोड़ता है,
फिर संभलने का मौका देता है,
और फिर वही चोट दोहरा देता है।

इसलिए कभी-कभी
एक झटके का दर्द भी कम है,
उस दर्द से
जो वर्षों तक
लाखों किश्तों में मिलता रहता है।

जो छूट गया,
उसका दुख मत गिनो,
यह भी देखो—
कितना कुछ
तुम झेलने से बच गए।
-रजनी
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all