एक बहाना
अंत में दोष न तुम्हारा होगा,
न हमारा कोई गुनाह होगा,
बस इश्वर रचेगा एक बहाना,
और हम बिछड़ जाएँगे।
न कोई बेवफ़ा कहलाएगा,
न कोई कसूरवार होगा,
बस वक़्त की मुट्ठी से
हमारा साथ छूट जाएगा।
हम चाहेंगे फिर भी एक-दूजे को,
मगर मिलना मुमकिन न होगा,
कहानी हमारी अधूरी रहेगी,
पर प्रेम अधूरा न होगा।
शायद यही लिखा था तक़दीर में,
कि मिलना भी एक इत्तिफ़ाक़ होगा,
और बिछड़ना भी उसी का फ़ैसला—
न तुम्हारा होगा, न हमारा होगा।
- रजनी