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एक बहाना

                
                                                         
                            एक बहाना
                                                                 
                            

अंत में दोष न तुम्हारा होगा,
न हमारा कोई गुनाह होगा,
बस इश्वर रचेगा एक बहाना,
और हम बिछड़ जाएँगे।

न कोई बेवफ़ा कहलाएगा,
न कोई कसूरवार होगा,
बस वक़्त की मुट्ठी से
हमारा साथ छूट जाएगा।

हम चाहेंगे फिर भी एक-दूजे को,
मगर मिलना मुमकिन न होगा,
कहानी हमारी अधूरी रहेगी,
पर प्रेम अधूरा न होगा।

शायद यही लिखा था तक़दीर में,
कि मिलना भी एक इत्तिफ़ाक़ होगा,
और बिछड़ना भी उसी का फ़ैसला—
न तुम्हारा होगा, न हमारा होगा।

- रजनी 
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6 घंटे पहले

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