दर्द की ठोकर
प्रेमी, पागल और कवि,
तीनों एक ही चीज़ से बने होते हैं—
दर्द की ठोकर से।
किसी ने प्रेम में ठोकर खाई,
तो वह प्रेमी बन गया,
किसी ने दुनिया से ठोकर खाई,
तो वह पागल कहलाया,
और जिसने अपने दर्द को
शब्द दे दिए,
वह कवि बन गया।
ठोकर सबको लगती है,
मगर हर कोई उसे समझ नहीं पाता,
कुछ टूटकर बिखर जाते हैं,
कुछ चुप हो जाते हैं,
और कुछ उसी दर्द को
कविता बना जाते हैं।
-रजनी