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दबाई हुई गेंद

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दबाई हुई गेंद
        
                                                    
                            

ऐसी कौन-सी गेंद है
जिसे आप दबाएँ
और वह कभी उछले नहीं?

जितना दबाओगे,
उतनी ही ताकत से
वह वापस उछलेगी।

नारी भी कुछ ऐसी ही है—
जिसे तुम जवानी में
दबाते हो,
उसकी इच्छाओं पर पहरा लगाते हो,
उसकी आवाज़ को चुप कराते हो,
उसके फैसलों पर शासन करते हो।

तो याद रखना—
वही नारी,
जब उम्र के उस पड़ाव पर पहुँचेगी
जहाँ उसे अपने जीवन का अनुभव
और अपनी ताकत समझ आने लगेगी,
तो वह भी उछलेगी।

तब उसकी चुप्पी
चुप्पी नहीं रहेगी,
उसका प्रतिरोध
तुम्हें दिखाई देगा।

इसलिए नारी को
दबाकर रखने की कोशिश मत करो—
क्योंकि दबाई हुई गेंद
हमेशा लौटकर उछलती है।

और कभी-कभी
इतनी ऊँची उछलती है
कि दबाने वाला
सिर्फ़ उसे देखता रह जाता है।
— रजनी
16 घंटे पहले
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