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दबाई हुई गेंद

                
                                                         
                            दबाई हुई गेंद
                                                                 
                            

ऐसी कौन-सी गेंद है
जिसे आप दबाएँ
और वह कभी उछले नहीं?

जितना दबाओगे,
उतनी ही ताकत से
वह वापस उछलेगी।

नारी भी कुछ ऐसी ही है—
जिसे तुम जवानी में
दबाते हो,
उसकी इच्छाओं पर पहरा लगाते हो,
उसकी आवाज़ को चुप कराते हो,
उसके फैसलों पर शासन करते हो।

तो याद रखना—
वही नारी,
जब उम्र के उस पड़ाव पर पहुँचेगी
जहाँ उसे अपने जीवन का अनुभव
और अपनी ताकत समझ आने लगेगी,
तो वह भी उछलेगी।

तब उसकी चुप्पी
चुप्पी नहीं रहेगी,
उसका प्रतिरोध
तुम्हें दिखाई देगा।

इसलिए नारी को
दबाकर रखने की कोशिश मत करो—
क्योंकि दबाई हुई गेंद
हमेशा लौटकर उछलती है।

और कभी-कभी
इतनी ऊँची उछलती है
कि दबाने वाला
सिर्फ़ उसे देखता रह जाता है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

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