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बहू भी किसी माँ की कोख से आई है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहू भी किसी माँ की कोख से आई है
        
                                                    
                            

बेटा पालने का एहसान मत गिनाइए,
रिश्तों को तानों में मत तौल जाइए।

जिसे बहू कहकर घर में लाए हैं,
वो भी किसी माँ की दुआओँ से आई है।

मिठाई के डिब्बे से नहीं निकली वो,
नौ महीने किसी माँ की कोख में पलकर आई है।

उसके भी कुछ सपने थे, कुछ अरमान थे,
अपने घर की लाड़ली, किसी की जान थी।

सम्मान देंगे तो घर स्वर्ग बन जाएगा,
अपमान करेंगे तो रिश्ता बिखर जाएगा।

बेटा आपका है, तो बहू भी किसी की बेटी है,
यही सोच हर परिवार की सबसे बड़ी समृद्धि है।
2 महीने पहले
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