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बहू भी किसी माँ की कोख से आई है

                
                                                         
                            बहू भी किसी माँ की कोख से आई है
                                                                 
                            

बेटा पालने का एहसान मत गिनाइए,
रिश्तों को तानों में मत तौल जाइए।

जिसे बहू कहकर घर में लाए हैं,
वो भी किसी माँ की दुआओँ से आई है।

मिठाई के डिब्बे से नहीं निकली वो,
नौ महीने किसी माँ की कोख में पलकर आई है।

उसके भी कुछ सपने थे, कुछ अरमान थे,
अपने घर की लाड़ली, किसी की जान थी।

सम्मान देंगे तो घर स्वर्ग बन जाएगा,
अपमान करेंगे तो रिश्ता बिखर जाएगा।

बेटा आपका है, तो बहू भी किसी की बेटी है,
यही सोच हर परिवार की सबसे बड़ी समृद्धि है।
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2 महीने पहले

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