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अब और अच्छा नहीं बनना

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब और अच्छा नहीं बनना
        
                                                    
                            

अपनी तारीफ़ सुनने का
बड़ा ही शौक पाल रखा था,
कि अच्छी बहू बन जाऊँ,
अच्छी पत्नी बन जाऊँ,
दुनिया वाले मेरी तारीफ़ करें—
बस यही ख्वाब पाल रखा था।

अच्छा बनने की कोशिश में
सबको खुश करते-करते,
मैं खुद को ही भूल बैठी,
दूसरों की नज़रों में अच्छा बनने के चक्कर में
अंदर से खोखली हो बैठी।

अब उस नशे का असर उतर गया है,
अब चाहे जो बनूँ,
मुझे दुनिया की नज़रों में
अच्छा नहीं बनना।

बस इतना अच्छा बनूँ
कि खुद को अच्छी लग सकूँ,
आईने में अपनी आँखों से
आँखें मिला सकूँ।

बहुत जी लिया
दूसरों की उम्मीदों के मुताबिक,
अब अपनी उम्मीदों पर जीना है।

बहुत कोशिश कर ली
सबकी नज़रों में अच्छा बनने की,
अब और अच्छा नहीं बनना—
अब बस खुद के लिए सच्चा बनना है।

— रजनी
एक महीने पहले
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