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आख़िरी इम्तिहान

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जितने भी इम्तिहान थे,
        
                                                    
                            
सब हमने दे दिए,
हर दर्द को सहकर,
हर आँसू पी लिए।

कभी हालातों ने परखा,
कभी अपनों ने आज़माया,
हर बार टूटकर भी
खुद को फिर से उठाया।

अब एक आख़िरी इम्तिहान बाकी है,
बस उसकी तारीख़ तय नहीं,
कब सामने आएगा वह पल,
इसकी कोई खबर नहीं।

मगर इतना यक़ीन है,
जब भी वह घड़ी आएगी,
इस बार मेरी खामोशी ही
मेरा जवाब बन जाएगी।

जितना सहना था, सह लिया,
जितना खोना था, खो दिया,
अब जो भी फैसला होगा,
वह वक्त पर छोड़ दिया।
-रजनी
11 घंटे पहले
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