विज्ञापन

मेरे लिए

Rajan Soni

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लड़ाई अब शायद तुम्हारी मेरी है ही नहीं
        
                                                    
                            
निकल चुकी है बात तुमसे मुझसे आगे
और हम लाख चाहे भी तो नामुमकिन है
कि हो जाए हम दोनों के बीच कोई सुलह
ऐसा नहीं कि मुझे ये सब अच्छा लगता है
मैं अपनी हार मे तुम्हारी जीत नहीं देख रहा
ना ही मेरी कोई ज़िद ही है तुमसे जुड़ी मुझमें
पर तुम्हारा हाथ छोड़ना, नहीं हो सकता
तुम्हारे उसूल मेरे प्यार से बड़े नहीं हो सकते
वो उसूल जिसकी ऊँची दीवार की हर ईंट
पे लग चुकी है उस दुनिया की ओछी फफूंद
जो ना तुझे पसंद है ना ही मुझे रास है
जल्दी किसे है इसे तोड़ने या फादने की
चोट करूँगा इसपे धीरे धीरे रोज़ चुपचाप मैं
मुझे पता है क़ैद किसी को नहीं भाती है
और अगर मैं ये दीवार ना भी गिरा पाया
तो पता है एक दिन इस दीवार के उस पार से
तुम खुद चली आओगी इस पार मेरे लिये

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile