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मौन पिता

RAJ KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पिता को मैंने अक्सर
        
                                                    
                            
मौन, बेचैन और गहरी तकलीफ़
में देखा है।

पिता को मैंने अक्सर
अपनों की जरूरतें पूरी करते-करते,
अपनी उम्र को गंवाते देखा है।

पिता को मैंने अक्सर
एक ही कमीज़ के उधड़े
धागों को सुई से सिलते देखा है।

हाँ, पिता को मैंने अक्सर
खुद को जलाकर
अपनों को तकलीफों से
निकालते देखा है।
3 महीने पहले
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