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ना सूरज रहेगा ना रोशनी

Rais Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना चांद रहेगा ना चांदनी
        
                                                    
                            
ना सूरज रहेगा ना रोशनी
बस रहेगा हम सब का प्यार
ना धर्म की दीवार ना ख़ॅजर ना तलवार
ना बटो ना छटो सब मिल कर रहो
ये बगिया है हिंद की रहेगी सदाबहार
हम दो नहीं एक हैं अनेक नहीं एक हैं
एक ही हमारा सावन गाते एक ही मल्हार
एक ही क़नदील है सोने सी अबाबील है
सरहद पे खड़े रईस हैं दुश्मनों को ललकार
ना चांद रहेगा ना चांदनी
ना सूरज रहेगा ना रोशनी
4 घंटे पहले
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