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जननी की अभिलाषा

Rahul Walia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हाय रे तनय!
        
                                                    
                            
सुख भोग शैशव काल के
मेरी गोदी में; मत कर
दंभ काया विशाल के
धात्री आज भी रोती है
माना कि कर्म चुनौती है
तुम्हें इस आस्तीन ने बड़ा किया
श्रम किया कि खुद को कड़ा किया
हां! दरिद्र रही कभी
पति-हेत अनिद्र रही तभी
न मिलन, अहे! अभिलाषा तेरी
वाट तकूंगी माता तेरी


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6 वर्ष पहले
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