सेहत सही रहे...
और क्या चाहें?
नौकरी की बस
चिंता लगी रहती है...
परिश्रम में
वृद्धि करने की ज़रूरत है!
दो-तीन दिन में निपटाना है बचा काम
अब से, रोज़ करना है भोर को प्रणाम
कम से कम
इतना तो सुधार होए...
मुख्य चीज़ों को तो
मुझे पूरा करना स्वीकार होए?!
नौकरी
पानी है
बिना रोग की...
ज़िंदगी करनी है!
जो जितना दे...
उसमें राज़ी-ख़ुशी हैं
क्योंकि
अब नहीं ज़िंदगी उलझी है
-राहुल
.