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उम्मीद...

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या सदा आती है
        
                                                    
                            
इस गीली हवा से?

फफूंदी, जाए झड़...
सर्दी की, धूप आते आते

एक एक पल...
कितना कीमती है साहिब!

गुज़र गए, कई साल...
बनते बेअदबी के शागिर्द 

अपनी ही ओर...
करूं, मैं अब नज़रें

'माने' पता चले...
अब जाके हिज्र के!

सामने रहना
ओझल होने के लिए

मैं बनूं नमूना...
ओस के पर्ल... तक पहुंचने के लिए...







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एक घंटा पहले
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jagdish bhandari

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