क्या सदा आती है
इस गीली हवा से?
फफूंदी, जाए झड़...
सर्दी की, धूप आते आते
एक एक पल...
कितना कीमती है साहिब!
गुज़र गए, कई साल...
बनते बेअदबी के शागिर्द
अपनी ही ओर...
करूं, मैं अब नज़रें
'माने' पता चले...
अब जाके हिज्र के!
सामने रहना
ओझल होने के लिए
मैं बनूं नमूना...
ओस के पर्ल... तक पहुंचने के लिए...
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