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शेश...

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एकांत मुझसे
        
                                                    
                            
नाख़ुश है

तन्हाई कहने की
साजिश है

बीते ग़मों के
अवशेष हैं...

राहुल,
कम ही दिन अब शेश हैं!

प्रभु के दर पर
क्यों नहीं शीश है?

इसलिए तो
पल पल अंदर रोष है...

भगवान,
आपको ही करवाना है!

बार बार गिरते को...
संभलवाना है

मैने हर इच्छा का
त्याग कर दिया है

खुदको, नई चुनौती के लिए
तैयार कर लिया है

अब कुछ...

बाद में ही लिखना है...



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2 घंटे पहले
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