जो होना था
हो चुका
'अब'
अच्छा करने से...
मैं क्यों रुका?
जो भगवान को
मंज़ूर हो
अभी दिखा दो राहुल...
पूरा ज़ोर शोर!
मैं खुश हूं... यारों
ऐ ख़िज़ाँ, तुम भी हसो
हर मौसम,
मेरी नज़र के मुताबिक़
क्यों रहूं...
मैं हर छन उदास फिर?
बेचैन मन
पाएगा शांति
कर मेहनत
संभलेगी हस्ती 🙂
मेरी ईमानदारी...
दम भरेगी!
क्या बेईमानी...
बूंद-भर ग़म देगी...
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