विज्ञापन

सुबह सुबह से क्या मलाल कहूं...

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवान
        
                                                    
                            
मदद कर दो मेरी

परेशान,
से परेशानी बतायी नहीं जा रही

चित्रों ने
गजब बहकाया :(

मित्रों ने
हल्का हाथ थामा

सुबह सुबह से क्या मलाल कहूं...

सोच सोच के क्या बुरे हाल लिखूं...

जाऊं...
हवा में घूम वूम आऊं... 

पाऊं,
ज़रा से फिर, फासले को

-राहुल



.
14 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12614 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

30 कविताएं

View Profile