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दुनिया का फसाना

Radha Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजीब है दुनिया का फसाना।
        
                                                    
                            
यहां न कोई अपना,न कोई बेगाना ।
अजीब है दुनिया का फसाना।

अपने बेगानों सा व्यवहार करते हैं
बेगाने अपनों सा प्यार करते हैं।
जिंदगी की रेल में सभी को है आना और जाना।
अजीब है दुनिया का फसाना।
यहां न कोई अपना न कोई बेगाना।

हर चेहरे पर नया चेहरा ।
कोई जताता नफरत तो कोई प्यार बहुत गहरा ।
किस्मत की पोटली में सभी ढूंढ रहे अपना खजाना।
अजीब है दुनिया का फसाना।
यहां न कोई अपना न कोई बेगाना ।

सब के सब मतलब के साथी ।
सबकी अलग राह और अलग है पातीं
आगे आने की होड़ में खींचते हाथ पैर और छाती
लोभ के लिए न कोई मजहब न कोई जाति ।
देख अपना स्वार्थ बदल गए लोग बदल गया जमाना।
अजीब है दुनिया का फसाना।
यहां न कोई अपना न कोई बेगाना ।

दूसरों को ज्ञान देना बहुत आसान होता है
जो खुद अमल करे वो ही महान होता है।
बड़ा मुश्किल है इस दुनिया में
खुद समझना और दूसरों को समझाना।
अजीब है दुनिया का फसाना।
यहां न कोई अपना ,न कोई बेगाना।
2 महीने पहले
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