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मेरी उम्र का जलना बाकी है

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी अभी तो सुबह हुई,
        
                                                    
                            
अभी दिन का ढलना बाकी है
राही रुकने का नाम न ले, अभी दूर बहुत तेरी मंजिल
लंबा सफर का चलना बाकी है

दो चार कदम अभी चले हो तुम ,
तेरी आंखे भर आई है
जरा आगे बढ़कर देखो तो ,
कितनी ऊंची नीची खाई है
देखो बहके ना तेरे कदम, आगे है और कितने गम
देखो बहके ना तेरे कदम, अभी गिरकर संभलना बाकी है

दर्द, गम, बला से हर कोई हाथ छुड़ाता है
पर ना जाने क्यों इनसे मेरा बरसों का अच्छा नाता है
कभी सुबह जला , कभी शाम जला
इनके बाहों में मैं हूं पला
मैं जानता हूं इनके संग अभी ,
मेरी उम्र का जलना बाकी है

छोड़ दिया था हमने कब का सपना सजना
ये किसने क्या जादू किया , मै तो होने लगा दीवाना
शोर मचाए मुझको बुलाये, जाने किसकी आवाज
मै कुछ ना समझूं ,कुछ ना जानूँ ये कैसा है राज
जाने कहां से आएगा मेरे लिए खुशियों का संदेश
मेरे दिल को है इंतजार, अभी इसक मचलना बाकी है
-रविन्द्र अमन
एक घंटा पहले
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