जाओ जहां सब पूछते हैं, क्या लोगे, चाय
काफी या ठंडा है तुझको पीना
पर कोई बताये ना, कैसे है हमको जीना
यहां दे दो किसी को रुपया पांच सौ, हजार
पर बुद्धी किसी को मत देना ,
यहां सब है होशियार
लल्लू सब से हंस के मिले, लल्लू जरा है भोला
पर लल्लू ये ना जाने, दुनिया दिखावे का है मेला
तुम्हारे अच्छा खराब से किसी को क्या है लेना
किसी का कुछ बिगड़े तो, तुम तमाशा देखो ना
जब आवे बुरा वक्त तो, आवे ना कोई काम
सब देख के तुझको हंस देंगे,
दूर से कह देंगे राम - राम
दही किसी का खट्टा कहो तो, हो जावे हंगामा
सूरत में मेरी मामी अच्छी नहीं ,
फिर भी दीवाना मेरा मामा
कुछ अनुभवों को सब को है बताना
सही राह कोई नहीं बताएगा
चाय ,कॉफी ठंडा पिलाकर
मार डालेगा जमाना
-रविन्द्र अमन