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इतना जोखिम कौन उठाता है

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमने लिखा है आप के लिए कुछ गजल
        
                                                    
                            
आप इसे पढ़िए,अगर आप को यह पसंद नहीं आया तो, मै इस गजल के साथ खुद को लूंगा बदल

अगर मुझसे आप का नही है कोई वास्ता
फिर मैं देखूंगा अपना कोई रास्ता

नई मछली फंसाने के लिए मैं फेंकता हूं अपना जाल
अगर नई मछली नही फंसी तो,
घर में बीवी से हो जाता हूं निहाल

या रब! हम शायरों की यह कैसी है जिंदगी
चाहे हर कुछ जाए ,पर जाती नही है दीवानगी

चाहे आपकी उम्र पचास पार हो,
चाहे जैसा हो अपना हल
इस दीवाने दिल की उम्र हमेशा रहे सोलह साल

ऐ मेरे रब हम शायरों को भी कोई सही राह दिखा दे
बस हमको इन हसीनों से बचा ले

इन हसीनों को देखकर हमको कुछ लिखने आता है
वरना आज के इस नाजुक दौर में ,
इतना जोखिम कौन उठाता है
-रविन्द्र अमन
4 घंटे पहले
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