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आत्महत्या

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना , ना, ना, मरना है किस बात का ,
        
                                                    
                            
तुझको डर है इस अंधेरी रात का
जिसका खुद का भरोसा नही है,
कल सुबह तक पता चल जाएगी उसकी औकात का

जिस जगह तुम हो ,उस जगह को बदल दो
जीवन चलने का नाम है, उठो, रुको मत, अभी चल दो

मन को बनाया है कचरे का भंडार
फिर सबसे कहते हो यह दुनिया है बेकार

अपने बीवी बच्चों से वादा किया था साथ निभाने का कहां गए वो कसमे वादे ,खुद हंसने का, सबको हँसने का

तुम्हारे जीवन की डोर क्यों है इतनी कमजोर
देखो तुम्हारे दिल में करके बड़ा गुनाह छुपा है कोई चोर

खुद को मारने के पहले उस चोर को तुम मारो
एक योद्धा की तरह जीवन का जंग लड़ो ,
मत पीछे हटो , मत हारो

जीने वाले दुश्मन का सीना चीर कर जीते हैं ,
किसी ने कहा है खूब
मुफ़्त में अपनी जान गंवाते हैं, मरते हैं बेवकूफ

इस जहां में तेरा भी है एक सपनों का आशियाना
यह दुनिया है दीवानी, तू होकर देख दीवाना

अगर कुछ सिख मिली हो तो औरों को भी सिखाओ
खुद बचो मेरे भाई, दूसरों को भी बचाओ
-रविन्द्र अमन
2 घंटे पहले
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Sanjai kumar

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