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अपना एक पल दिया होता

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिट जाती मेरी सदियों की प्यास
        
                                                    
                            
तू ने अगर मुझको अपना एक पल दिया होता

तुझसे दिल लगाना शायद मेरी भूल थी
पर किसी को चाहना कसूर नहीं होता है

जो प्यार का मंज़र बीत गया
यह सोच कर दिल रोता है
पर कब लौट कर आता है गुजरा हुआ जमाना

माना मुझसे मिलना तेरी कोई मजबूरी थी
पर अपना सब लूटा कर मैं पास तुम्हारे आया था

बातों को बढ़ाकर , किसी की दुनिया में आग लगाकर
कुछ लोग खुद से बन जाते हैं अनजान

कितना हसीन था वो प्यार का जमाना
मैं भंवरा बन कर रोज करता था तेरी बगिया में आना जाना

क्यों प्यार में होता है ऐसा अक्सर
अपना जादू चलाकर गुम हो जाते हैं दिलवर

अफसोस नहीं तेरे प्यार में हमको कुछ ना कुछ तो मिला है
बरसों बीत गए,तेरी यादों का फूल आज भी खिला है

आज भी तेरे हसीं सपनों में डूबकर
हम अपनी रातों को रंगीन किया कर लेते हैं

रविन्द्र अमन - कोलकाता
2 महीने पहले
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