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बेटी एक रत्न है अभिशाप नहीं

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब थी मैं कोख में माँ की
        
                                                    
                            
खुशहाली की लहर थी पूरे घर में
जन्म नहीं लिया था जबतक मैंने
जन्म लिया ज्यो ही मैंने
सिमत गए सबके Mathe
जैसे इनकी नाइया डूब गई हो
क्या. गुनाह किया मैंने
ईस जग मैं. आकर
बेटी हू अनर्थ नहीं
बेटी ना होती
बेटा और. वधू कहाँ से. Late
बेटी है जो आज किसी और
कल वो वधु और माँ है तुम्हारी
बेटा के हिमातियो
बेटी एक रत्न है अभिशाप नहीं
-रंजीत चाहर
3 महीने पहले
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