युद्ध होता तो आर
पार होता,
ये क्या पटाखा फुस्स हुआ।
अच्छा समय था
Pok अपना होता ।
जो छीना था हमारा होता।
खून की होली तो खेल
लेने देते जांबाजों को
कितना अच्छा होता।
पाक को नाक तो रगड़वा
देते तो कितना अच्छा होता।
जो सपूत चले गए
कम से कम आत्मा को
शांति तो मिलती।
ये युद्ध दो चार दिन और
होता तो कितना अच्छा होता।
-पुष्पा गुप्ता