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पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के सामाजिक दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पशु पक्षी सा बन रहा, मानव का व्यवहार।
        
                                                    
                            
स्व से ही बस प्रेम बचा, शयन, काम, आहार।।
---पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
एक घंटा पहले
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