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पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज्ञाता भी अब ना रहा, बचा ज्ञान ही शेष।
        
                                                    
                            
वही सदा सर्वत्र है,  चेतन नंद अशेष।।

मैं को मैं से विलग कर, देखें मैं है कौन।
करने वाला अगर तू,  दृष्टा अंदर  कौन।।
-पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
3 महीने पहले
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