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डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब आलंबन सुख नहीं, भीतर ही आनंद।
        
                                                    
                            
सेवक स्वामी इक भये, बाकी  परमानंद ।।
-पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
17 घंटे पहले
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