“कलाम को प्रणाम है, कलाम को सलाम,
जब तक रहेगी दुनिया, तब तक रहेगा उनका नाम,
ऐसी थी उनकी शख्सियत, कोई क्या करे बयान,
लाखों की भीड़ में भी, अलग दिखते थे कलाम,
माथे पर लटकती जुल्फें, मुख पर सदाबहार मुस्कान,
चेहरे पर तेज़, तीव्र दिमाग, और साफ दिल, यही थी उनकी पहचान,
उपलब्धियां थी उनकी इतनी, शब्दों में नही की जा सकती बयान,
बयान करने की कोशिश भी करो, तो हो जाये सुबह से शाम,
हर किसी को वो प्रिय थे, चाहें वो खास हो या आम,
सादगी से रह कर भी, उन्होंने किये विशिष्ट काम,
कलाम को प्रणाम है, कलाम को सलाम,
जब तक रहेगी दुनिया, तब तक रहेगा उनका नाम,
सारा जीवन किया उन्होंने, देश व समाज हित में निस्वार्थ भाव से काम,
जीवनभर वो देते रहे, शिक्षा भाईचारे और शांति का पैगाम,
वो नही जानते थे थकना, वो थे अपार ऊर्जावान,
बच्चों के प्रति उनके मन में, था विशेष प्रेम,
स्वदेशी मिसाइलें बना कर, वो कहलाये मिसाइलमैन,
भारतीय विज्ञान को दिया उन्होंने, एक नया मुकाम,
भारतरत्न सहित प्राप्त हुए उन्हें, देश-विदेश में अनेकों ईनाम,
किन्तु उन्होंने कभी भी नही किया,अपनी उपलब्धियों पर अभिमान,
कलाम को प्रणाम है, कलाम को सलाम,
जब तक रहेगी दुनिया, तब तक रहेगा उनका नाम,
ऐसे सच्चे सपूत के मिलने का, भारत माँ को भी था मान,
विश्वभर में बढ़ाई उन्होंने, अपने देश की शान,
सभी धर्मों के प्रति था, उनके मन में सम्मान,
वो एक निगाह से देखते थे, चाहें गीता हो या कुरान,
वो थे एक दार्शनिक, एक विचारक और एक संत महान,
पड़ते थे उनके कदम जहाँ भी, वो बन जाता था एक धाम,
वो एक ऐसे फूल थे जो, गुलशन को कर गये वीरान,
उनके जाने से लग गया, एक युग को पूर्ण विराम,
कलाम को प्रणाम है, कलाम को सलाम,
जब तक रहेगी दुनिया, तबतक रहेगा उनका नाम l”
- काफिर चन्दौसवी
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