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मैत्री दिवस पर कविता

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो पुनः सोचें मैत्री ,
        
                                                    
                            
प्रकृति ,धरा से करें मैत्री
वायु गगन से करें मैत्री।
मैत्री हो सद्विचार से
जो आयें हर संस्कृति से ,
आयें कहीं किधर से भी।
मैत्री हो मानवता से ,
संपूर्ण सृष्टि से करें मैत्री।
आज स्वयं से करें मैत्री,
चलो पुनः सोचें मैत्री।
2 महीने पहले
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