चलो पुनः सोचें मैत्री ,
प्रकृति ,धरा से करें मैत्री
वायु गगन से करें मैत्री।
मैत्री हो सद्विचार से
जो आयें हर संस्कृति से ,
आयें कहीं किधर से भी।
मैत्री हो मानवता से ,
संपूर्ण सृष्टि से करें मैत्री।
आज स्वयं से करें मैत्री,
चलो पुनः सोचें मैत्री।
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