मन ही मन को समझाता है
जब भी ये मन घबराता है
कहता है मन तू धीरज धर
सब अन्त में ठीक हो जाता है ।
क्या हुआ जो समय कष्ट का है
क्या हुआ जो समय दर्द का है
शब्द सुने इन कानों ने,
सुख, दुख के बाद ही आता है
कहता है मन तू धीरज धर
सब अन्त में ठीक हो जाता है ।
क्या हुआ जो तू अभी नाखुश है
क्या हुआ जो तू बिल्कुल चुप है
चुप्पी को तोड़ हमें हरदम,
खुशियों का झरना बुलाता है
कहता है मन तू धीरज धर
सब अन्त में ठीक हो जाता है ।
क्या हुआ जो अश्रु ये बहते हैं
क्या हुआ जो हम सब सहते हैं
अश्रु निकल जाने के बाद,
सब साफ दिखाई देता है
कहता है मन तू धीरज धर
सब अन्त में ठीक हो जाता है ।
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