मैने उसके घर का पता पूछा ही नहीं
सज़ा मालूम थी खता पूछा ही नहीं
वो दौर बीत गया कि हम किसी के होते थे
अब किसके हैं किसी ने पूछा ही नहीं
दुआ करो कि मेरी दुआ भी कभी रंग लाए
मेरी क्या दुआ थी खुदा ने पूछा ही नहीं
कभी उनके दर तक तो पहुंच ही जाना है
मिलने पर पहचानोगे हमने तुमसे पूछा ही नहीं
तुम साथ साथ चलो न कुछ कदम मेरे साथ भी
कहानी का अंजाम क्या है तुमने पूछा ही नहीं
कुछ किस्से ख़त्म हो जाते हैं राह तकते तकते
मेरी कहानी में कौन से किरदार हो पूछा ही नहीं।