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तुम काली साड़ी पहन कर आती हो।

Prince Avinash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसती है जेठ की धूप से भी फुहारें,
        
                                                    
                            
‎जब तुम काली साड़ी पहन कर आती हो।
‎हज़ारों तो देख कर ही जान गंवाते हैं,
‎जब तुम जुल्फ़ें संभाल कर शर्माती हो।
‎हम तो इश्क़ की राह में गिरने संभलने आए हैं,
‎तुम इन राहों पर क्यों नहीं चल पाती हो।
‎मोम है दिल तुम्हारा, इससे कभी नहीं खेलेगा "प्रिंस"
‎तुम मेरा सुकून हो ये बात कैसे नहीं समझ पाती हो
एक घंटा पहले
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