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शायरी

Prem Solanki

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितनी नफ़रत कर सकती हो तुम मुझसे,
        
                                                    
                            
क्या इतनी कर सकती हो जितनी मैंने मोहब्बत की है तुझसे,

- प्रेम सोलंकी

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5 वर्ष पहले
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