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फसाना ए नाकाम हसरतें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अरमां दिल का आंसुओं में बहाने से होगा कुछ नहीं ये सोच के बढ़ा के हौसला अरमां दिल का आज़ हम बढ़ाए हैं
        
                                                    
                            
हालांकि हुआ मुश्किल बहुत समेटना बिखरती तमन्नाएं अपनी मगर जगा के अरमां दिल में करीब तेरे हम आए हैं
बदल कर फैसला किया अच्छा तुमने कब करके भरोसा अपनी वफाओं पे अब करने गिला सामने तेरे हम आए है
निभाया तो मैने रस्म ए वफा शिद्दत से मगर हुआ मेरा कब तू बढ़ा के दर्द ओ तमन्ना चिराग़ ए दिल हम जलाए हैं
करके तुम मनमानियां करोगे कमजोर बुनियाद रिश्तों की करने लगे हो जान कर मंसूबे तुम्हें आज़ हम आजमाए हैं
एक घंटा पहले
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Sanjai kumar

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