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फसाना ए नाकाम हसरतें

                
                                                         
                            अरमां दिल का आंसुओं में बहाने से होगा कुछ नहीं ये सोच के बढ़ा के हौसला अरमां दिल का आज़ हम बढ़ाए हैं
                                                                 
                            
हालांकि हुआ मुश्किल बहुत समेटना बिखरती तमन्नाएं अपनी मगर जगा के अरमां दिल में करीब तेरे हम आए हैं
बदल कर फैसला किया अच्छा तुमने कब करके भरोसा अपनी वफाओं पे अब करने गिला सामने तेरे हम आए है
निभाया तो मैने रस्म ए वफा शिद्दत से मगर हुआ मेरा कब तू बढ़ा के दर्द ओ तमन्ना चिराग़ ए दिल हम जलाए हैं
करके तुम मनमानियां करोगे कमजोर बुनियाद रिश्तों की करने लगे हो जान कर मंसूबे तुम्हें आज़ हम आजमाए हैं
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53 minutes ago

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