विज्ञापन

फसाना ए मजबूर दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिल कर आपसे जब जुदा हुए तो मुझसे खफा हो बैठे मिटा कर अरमां आप बेवफा हो बैठे
        
                                                    
                            
देख के बेरुखी तेरी हम खुद में ही खो बैठे तू भी न हो सका मेरा सोच कर अब आस खो बैठे
लिखा जो खत मैने तुम्हें मिला होगा जरूर और न दिया तूने जवाब सोच के हम वफा खो बैठे
बात दिल की सुनने की फुर्सत है कहां गर्दिश ए हालात अब सोच कर दिल के अरमां खो बैठे
है दर्द हमें खफा तुम्हें देख कर अब हक वफा का जता कर तुमसे हम अपनी जिंदगी खो बैठे
6 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

Nivedan Kumar

12 कविताएं

View Profile