मेरी खामोशियों को घुट घुट के जीना आ गया और आप समझ बैठे हमें रंज सहना आ गया
पूछता नहीं कोई मुझसे हाल ए गम कभी और सच ये हमें भी हाल ए गम छुपाना आ गया
अब कोई अपना ही नहीं दिखता इस जहां में हमको भी मिटा कर अरमां जीना आ गया
मेरे करम पे शक तुमको क्यूं वरना कसूर क्या था मेरा तुम्हें भी दूर मुझसे रहना आ गया
ऐ जिंदगी तुम्हें न समझ सका मैं कभी जान कर अंदाज ए बेरुखी हमें जहर पीना आ गया