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फसाना ए खामोश दिल

                
                                                         
                            मेरी खामोशियों को घुट घुट के जीना आ गया और आप समझ बैठे हमें रंज सहना आ गया
                                                                 
                            
पूछता नहीं कोई मुझसे हाल ए गम कभी और सच ये हमें भी हाल ए गम छुपाना आ गया
अब कोई अपना ही नहीं दिखता इस जहां में हमको भी मिटा कर अरमां जीना आ गया
मेरे करम पे शक तुमको क्यूं वरना कसूर क्या था मेरा तुम्हें भी दूर मुझसे रहना आ गया
ऐ जिंदगी तुम्हें न समझ सका मैं कभी जान कर अंदाज ए बेरुखी हमें जहर पीना आ गया
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3 महीने पहले

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