विज्ञापन

फसाना ए दिल ए नादां

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            होकर मायूस जिंदगी से घुट घुट कर हमें अब जीना पड़ेगा मिटा कर ख्वाहिशें सारी सफर में फासला रखना पड़ेगा
        
                                                    
                            
है आरजू मेरी रहे अर्ज सलामत हमेशा वरना बढ़ा कर फासला तुमसे होकर मजबूर अरमां सारे हमें मिटाना पड़ेगा
पूछते नहीं कभी हाल ए गम मेरा तो हुआ क्या हमें होकर खाक बढ़ा कर मायूसी अब कोशिशें सारी भुलाना पड़ेगा
सिवा तेरे रहा ना अपना कोई इस जहां में हमें भी होकर मजबूर वफाओं से ही बहाना कोई जीने का ढूंढना पड़ेगा
हुआ तुम्हें मेरे करम पे शक अचानक क्यूं वरना बता दो कुसूर मेरा क्या जान के इरादा तेरा हमें समझना पड़ेगा
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajan

30 कविताएं

View Profile