होकर मायूस जिंदगी से घुट घुट कर हमें अब जीना पड़ेगा मिटा कर ख्वाहिशें सारी सफर में फासला रखना पड़ेगा
है आरजू मेरी रहे अर्ज सलामत हमेशा वरना बढ़ा कर फासला तुमसे होकर मजबूर अरमां सारे हमें मिटाना पड़ेगा
पूछते नहीं कभी हाल ए गम मेरा तो हुआ क्या हमें होकर खाक बढ़ा कर मायूसी अब कोशिशें सारी भुलाना पड़ेगा
सिवा तेरे रहा ना अपना कोई इस जहां में हमें भी होकर मजबूर वफाओं से ही बहाना कोई जीने का ढूंढना पड़ेगा
हुआ तुम्हें मेरे करम पे शक अचानक क्यूं वरना बता दो कुसूर मेरा क्या जान के इरादा तेरा हमें समझना पड़ेगा
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