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फसाना ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच ये खेल किस्मत का कभी किसी ने जाना कहां और लड़ के अपनी किस्मत से अंदाज़ तेरा मैने कभी जाना नहीं
        
                                                    
                            
सजा के अरमां दिल में आंसू बहा रहे हैं गुजार दी है जो जिंदगी हुआ मजबूर मैं कितना सच तुमने कभी जाना नहीं
करके तू मनमानियां बुनियाद रिश्तों की कमजोर करने लगे दर्द सिर्फ ये सच क्या झूठ क्या तुमने भी जाना नहीं
बदल कर फैसला अपना किया तुमने अच्छा कब सितम ये बढ़ा के फासला फिर भी तुने कभी हमें पहचाना नहीं
निभाया हमने बार बार रस्म ए वफा शिद्दत से मगर बढ़ा के दर्द ओ तमन्ना बेशुमार तुमने हमें अपना जाना नहीं

 
22 घंटे पहले
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