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फसाना ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़े सलीके से तुमसे ही अर्ज करना है जो खोया मैने तुम्हें दिल देकर हमें वो हिस्सा तेरे दिल से कायदे से निकालना है
        
                                                    
                            
ये रूह भी जो दफन है बरसों से गर तुम ही मदद करोगे तो हमें बदन के मलवे से कोशिश कर इसे जिंदा निकालना है
सोच कर गम शनास न मिल जाए कहीं बेच के सुखन भी जीने खातिर अब हमें दिल तोड़ के भी तुमसे दिल लगाना है
वक्त से धोखा भी हम खाए तुम्हें बतलाना है मैं इक किरदार से तंग आ चुका हूं गर तुम्हें मिले फुर्सत तो हमें बताना है
कभी दिल में ख्याल आया निभा कर अहद ए वफा मिला क्या हमें बैठे भी हैं बेचैन कब से ये सच भी तुम्हें जानना है
11 घंटे पहले
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