विज्ञापन

फसाना ए बेकरार दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बढ़ा कर अरमां दर्द किसी का बढ़ाया नहीं करते होकर मायूस जिंदगी से दर्द गैर को भी बताया नहीं करते
        
                                                    
                            
है मुश्किल बहुत निभाना रस्म ए वफा शिद्दत से समझ कर हर किसी को अपना मोहब्बत बढ़ाया नहीं करते
करके दोस्ती कांटों से निभाना पड़ा रस्म ए वफा शिद्दत से सच ये गैरों को भी दर्द अपना बताया नहीं करते
गर नींद आपकी उड़ा ले जाए तो कोई बात नहीं मगर उड़ा के नींद किसी और की कभी सताया नहीं करते
सच ये मिल के तुमसे दिल से हम जुदा ना हो पाए है बढ़ा कर बदनामियाँ किसी की मर्ज बढ़ाया नहीं करते

 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10926 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

478 कविताएं

View Profile