बढ़ा कर अरमां दर्द किसी का बढ़ाया नहीं करते होकर मायूस जिंदगी से दर्द गैर को भी बताया नहीं करते
है मुश्किल बहुत निभाना रस्म ए वफा शिद्दत से समझ कर हर किसी को अपना मोहब्बत बढ़ाया नहीं करते
करके दोस्ती कांटों से निभाना पड़ा रस्म ए वफा शिद्दत से सच ये गैरों को भी दर्द अपना बताया नहीं करते
गर नींद आपकी उड़ा ले जाए तो कोई बात नहीं मगर उड़ा के नींद किसी और की कभी सताया नहीं करते
सच ये मिल के तुमसे दिल से हम जुदा ना हो पाए है बढ़ा कर बदनामियाँ किसी की मर्ज बढ़ाया नहीं करते